Tuesday, May 10, 2011
दस पत्रकारों/छायाकारों के लिए एक-एक लाख का पुरस्कार
झारखंड सरकार ने दस पत्रकारों/छायाकारों को एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की योजना बनायी है। दो पुरस्कार राज्य स्तरीय विकास के लिए और दो पुरस्कार जिला स्तरीय पुरस्कार के लिए दिये जायेंगे। जनजातीय भाषाआ में विकास संबंधी दो पत्रकारों, इलेक्ट्रानिक के दो पत्रकारों और दो छायाकारों को पुरस्कार मिलेंगे। विवरण - READ
Friday, May 6, 2011
झारखंड मीडिया फेलोशिप
झारखंड सरकार ने 20 पत्रकारों को मीडिया फेलोशिप के तहत 50-50 हजार की राशि देने की घोषणा की है। यह खासकर युवा एवं गंभीर मीडियाकर्मियों एवं शोधकर्ताओं के लिए एक अनूठा अवसर है। आवेदन की अंतिम तिथि 25 मई 2011 है। पूरी जानकारी http://www.jharkhand.gov.in में मिलेगी। READ
Saturday, March 19, 2011
The 3rd National RTI Convention
The National Campaign for People’s RTI (NCPRI) and MRTIM organized a 3-day Convention on RTI from 10th to 12th March 2011 in Shillong (Meghalaya). Ms. Nandini Sahai, Director, The International Centre Goa and Mr. Rajan Ghate, recipient of National RTI Award 2010 from Goa also attended the convention. READ
Saturday, December 11, 2010
A whistle blower suffers for raising voice
A whistle blower suffers for raising voice against corruption in DVC Friday December 10, 2010 Calcutta A K Jain, Deputy Chief Engineer Damodar Valley Corporation blew the whistle against corruption and mismanagement in the corporation five years ago and fought different battles leading to repatriation of high officials but he is waiting for his long overdue promotion. READ
Monday, December 6, 2010
Four information commissioners skip RTI meet
The Telegraph, 06-12-2010
Arvind Kejriwal takes umbrage at blatant violation of act by state body
Ranchi, Dec. 5: A public hearing on the right to information (RTI) Act in the capital and only two of the six state information commissioners show up, baring a blundering and laggard organisation that passes as the sentinel of truth in Jharkhand. READ
The Telegraph, 06-12-2010
Arvind Kejriwal takes umbrage at blatant violation of act by state body
Ranchi, Dec. 5: A public hearing on the right to information (RTI) Act in the capital and only two of the six state information commissioners show up, baring a blundering and laggard organisation that passes as the sentinel of truth in Jharkhand. READ
Friday, October 15, 2010
RTI Forum felicitates 11 for their vigilance
The RTI enabling every Indian citizen to seek information from a public authority, to be given within 30 days — completed five years on Tuesday. People have used the Act to question, probe, demand transparency and voice dissent. Meet 11 citizen vigilantes of the state, who were felicitated by Jharkhand RTI Forum on Tuesday in the capital for ushering in winds of change. READ
Thursday, October 14, 2010
अधिकारियों के लिए भी मददगार आरटीआइ
पहले कुछ अधिकारियों में धारणा थी कि आरटीआइ से उन्हें परेशानी है। लेकिन अब अधिकारी भी अपने हित में इसका उपयोग कर रहे हैं। पलामू की उपायुक्त श्रीमती पूजा सिंहल को एक आरोप की सच्चाई सामने लाने के लिए आरटीआइ की मदद मिली। झारखंड के ही एक आइएएस को सीबीआइ व आयकर की कार्रवाई से राहत में आरटीआइ का उपयोग हुआ। इस कानून ने देश को एक सकारात्मक दिशा दी है। READ
Wednesday, October 13, 2010
Saturday, October 9, 2010
बिकाऊ है भारत सरकार, बोलो खरीदोगे ?
अरविन्द केजरीवाल
90 के दशक के अंत में आयकर विभाग ने कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों का सर्वे किया। सर्वे में ये कंपनियां रंगे हाथों टैक्स की चोरी करते पायी गयीं, उन्होंने सीधे अपना जुर्म कबूल किया और बिना कोई अपील किये सारा टैक्स जमा कर दिया। अगर ये लोग किसी और देश में होते तो अभी तक उनके वरिष्ठ अधिकारियों को जेल भेज दिया गया होता। एक कम्पनी पर सर्वे के दौरान उस कम्पनी के विदेशी मुखिया ने आयकर टीम को धमकी दी - ‘‘आपको पता नहीं हम कितने ताकतवर हैं। हम आपकी संसद से कोई भी कानून पारित करा सकते हैं। आप लोगों का तबादला भी करा सकते हैं।’’ कुछ दिन बाद ही इस आयकर टीम के एक हेड का तबादला कर दिया गया। READ
Saturday, October 2, 2010
आरटीआइ से मिली छात्रवृति
रांची विवि ने गरीब विद्यार्थियों को छला
विष्णु राजगढ़िया
रांची: बीपीएल श्रेणी के सैकड़ों छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा की सुविधा और छात्रवृति की राशि से वंचित होना पड़ा है। रांची विश्वविद्यालय में नौकरशाही कार्यशैली का खामियाजा गरीब विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। इससे लोककल्याणकारी राज्य की भी कलई खुल गयी है।
रांची विश्वविद्यालय के कुलपति ने 30 अगस्त 2007 को आदेश संख्या 735/07 के माध्यम से गरीब विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की थी। तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी की पहल पर यह घोषणा हुई थी। इसमें प्रावधान था कि रांची विश्वविद्यालय के प्रत्येक स्नातकोत्तर विभाग में बीपीएल श्रेणी के दो-दो विद्यार्थियों का निशुल्क नामांकन होगा। उन्हें हर तरह का शुल्क माफ करने के साथ ही प्रतिमाह 500 रुपये छात्रवृति का भी प्रावधान रखा गया। इसे वर्ष 2007 से प्रत्येक सत्र में लागू करने की अधिसूचना निकाली गयी। लेकिन किसी भी विभाग ने इसे लागू करने की जरूरत नहीं समझी।
इस दौरान जिन छात्र-छात्राआंे ने अपना यह अधिकार हासिल करने का प्रयास किया, उन्हें उपेक्षा और अपमान का शिकार होना पड़ा। राजनीति विज्ञान की छात्रा पुष्पा कुमारी भी उनमें एक थी। इस बीच पुष्पा के भाई मुकेश कुमार गुप्ता ने झारखंड सरकार के श्रीकृष्ण लोक प्रशिक्षण संस्थान में सूचना कानून का प्रशिक्षण हासिल किया। भाई की मदद से पुष्पा कुमारी ने रांची विश्वविद्यालय से सूचना मांगी कि प्रत्येक सत्र में प्रत्येक विभाग ने किन छात्र-छात्राओं को निशुल्क शिक्षा और छात्रवृति प्रदान की। इस आवेदन के दबाव में रांची विश्वविद्यालय ने पुष्पा कुमारी को छात्रवृति की राशि प्रदान कर दी। उसके बैच के एक अन्य विद्यार्थी को भी यह राशि मिल गयी। रांची विश्वविद्यालय के 23 विभागों से मिली सूचना के अनुसार किसी भी विभाग ने उक्त आदेश का पालन नहीं किया था। जाहिर है कि सूचना कानून के कारण ही पुष्पा को छात्रवृति की राशि मिल सकी है। अब पुष्पा और मुकेश ने इस प्रावधान की जानकारी अधिक से अधिक गरीब विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उन्हें इसका समुचित लाभ दिलाने का बीड़ा उठाया है। झारखंड आरटीआइ फोरम ने 12 अक्तूबर को सूचना कानून की पांचवीं वर्षगांठ पर पुष्पा कुमारी को आरटीआइ सिटिजन अवार्ड देने की घोषणा की है।
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